कॉलेज के आखिरी कुछ दिन (Farewell)
बस अब आखिरी के कुछ दिन ही तो रह गए हैं,
मानो हम मेहमान बन गए हैं ।
समेट रही हूँ जो कुछ भी समेट सकूँ, पर सब बिखरा-बिखरा सा लग रहा है,
मानो मेरा ही कोई एक हिस्सा पीछे छूट रहा है ।
ये चार साल का सफर आठ सेकंड में रिवाइंड हो जाता है,
कुछ 16 एक्सप्रेशंस और अनगिनत इमोशंस दे जाता है ।
न जाने इस सफर की कैसी शुरुआत हुई होगी,
करीब-करीब 100 लोगों से मुलाकात हुई होगी,
50 से बात हुई होगी और 5 दिल में बस गए होंगे
बस फिर क्या, हम उनके साथ चल दिए होंगे ।
मुझे तो यह भी नहीं पता इस सफर का अंत किसे मानूँ?
उस पल को जो मुझे लगता है मेरा डिपार्टमेंट में आखिरी पल हो सकता है
उसे जब मुझे लगता है मैं अपना कपबोर्ड आखिरी बार बंद कर रही होंगी,
या फिर उसे जो मुझे लगता है दोस्तों से आखिरी मुलाकात हो सकती है।
क्या एक और मुलाकात की उम्मीद करना गलत होगा?
मन तो नहीं है पर आगे तो बढ़ना ही है,
पर कुछ पल ठहर कर आँखें नम करने में भी कुछ बुराई नहीं है ।
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