एहसास
ना जाने ऐसा क्यों होता है,
जो आपका होता है वही पराया हो जाता है|
सोचा था साथ रहेंगे हमेशा,
किसे पता था नफरत करेंगे इस तरह||
कल जो मिले थे हँस के,
आज वो ही पल आँखों में आँसू ला देते हैं|
अनजाने में मिली वो जो ख़ुशी थी,
अनजाने में दुःख दे जाते हैं||
लगता था जी ना पाएँगे हम जिसके बिना,
आज उसके साथ ना जीने की कसम खा ली है|
हँसी की वजह बनाया था हमने जिसे,
उसके बग़ैर मुस्कराने की आदत दाल ली है||
टहलते हुए पहुँच जाते हैं,
उन हसीन जगहों पे कभी|
मुस्कान तो आती ही है,
ग़म भी लौट आते हैं सभी||
अपनों के लिए जीना चाहते थे,
अपने ही कहीं खो गए|
अब खुद के लिए भी जीना है,
अपनों को खोज कर||
आँखें पढ़ लेते थे जो,
हम कैसे नहीं पढ़ पाए उनकी आँखें|
प्यार किया था जिनसे,
हम कैसे नहीं समझ पाए उनकी बातें||
दौड़ में हमेशा अव्वल आते थे वो,
भागना उन्हें पसंद था|
जिंदगी से भाग रहे थे वो,
हमे कहाँ पता था||
सीखा था जिनसे भरोसा करना,
उन्होंने ही भरोसा तोड़ दिया|
हर छोटी बात पर रो पड़ते थे हम,
उन्होंने दर्द में भी मुस्कराने के लिए छोड़ दिया||
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