बचपन
सपनों में यूँ ही चले आते हो,
एक मीठा-सा एहसास दे जाते हो
पलकें भी नहीं तैयार बिछड़ने को
इतनी ख़ूबसूरत महफ़िल जमा जाते हो।
कभी देखा था तुम्हे दूर से
हर पल मुस्कुराते रहते थे तुम
प्यारी-सी हँसी थी, आँखों में बेहद ख़ुशी थी
दुनिया के सच से अनजान थे तुम।
मैं आज भी तुम्हारा इंतज़ार करती हूँ
पलटकर फिर एक बार देखती हूँ
ऐ बचपन तुम लौटकर फिर क्यों नहीं आते हो?
एक मीठा-सा एहसास दे जाते हो
पलकें भी नहीं तैयार बिछड़ने को
इतनी ख़ूबसूरत महफ़िल जमा जाते हो।
कभी देखा था तुम्हे दूर से
हर पल मुस्कुराते रहते थे तुम
प्यारी-सी हँसी थी, आँखों में बेहद ख़ुशी थी
दुनिया के सच से अनजान थे तुम।
मैं आज भी तुम्हारा इंतज़ार करती हूँ
पलटकर फिर एक बार देखती हूँ
ऐ बचपन तुम लौटकर फिर क्यों नहीं आते हो?
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