होम-कमिंग

आँखों में कुछ बड़ी उम्मीदें लिए
चल दिए उस अनजान शहर की ओर
न रहने का ठिकाना था
न खाने का कुछ पता था
पर थी सपनों में इतनी ताकत
की बना लिया छोटा आशियाना वहाँ
नहीं थी खबर मुझे की 
दूर की चकाचौंध भी सिर्फ अँधेरों में भाती है
लौट कर आना तो घर ही है
खुशियाँ वहीं से आती है

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