आसमाँ की पूर्णता
मॉल की लॉन में बैठे हुए देख रही थी मैं नीले अम्बर को झाँक रहे थे बादल ऊँची बिल्डिंग्स के बीच से कितनी शान्ति थी वहाँ एक अलग-सा सुकून महसूस हो रहा था उनकी दीदार से मैंने एक नज़र अपने बगल में भी डाली रोड पे खड़ी ट्रैफ़िक समझ आया कितना बेसब्र है आदमी कितनी हड़बड़ी है उसे न जाने किस दौड़ का हिस्सा बना हुआ है वो जो ठहर कर एक पल के लिए एक लम्बी गहरी साँस भी नहीं ले सकता कितना सुन्दर एहसास था उनका हाथ पकड़कर आसमाँ की पूर्णता को समझना ।