अन्याय
कुछ दिनों पहले की बात है । मैंने उसे सड़क के किनारे पत्थर बीनते हुए देखा था । मासूम चेहरा, गहरी आँखें, और हमेशा बोलते रहने को तत्पर होंठ । बड़े मन से वो अलग अलग तरह के पत्थर बिन रही थी । वहीं पर एक महिला अपने झोले को लापरवाही से छोड़कर फ़ोन पर बातें कर रही थी । वह लड़की पत्थर बीनते बीनते वहाँ पर पहुंची | झोले के निचे पड़े खूबसूरत से पत्थर को उठाने झुकी ही थी कि महिला ने शोर मचा दिया कि वह चोरी कर रही है । उसकी छान-बिन हुई और कुछ न मिलने पर लोगो ने उसे घिन्न नज़रों से देखकर छोड़ दिया । मैंने देखा था उसने झोले को छुआ तक नहीं था । और लोगों ने भी देखा ही होगा । पर किसी ने भी उसका साथ नहीं दिया शायद इसीलिए क्योंकि न चाहते हुए भी हम सब और मैं भी इस अन्याय कि दुनिया का हिस्सा हैं ।